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इंडियन आवाज़     25 Sep 2018 02:22:20      انڈین آواز
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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई भारत के नये प्रधान न्यायाधीश होंगे

CJI Gagoi

 

न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई भारत के अगले प्रधान न्‍यायाधीश होंगे। वे अगले महीने की दो तारीख को सेवा निवृत्‍त हो रहे प्रधान न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा का स्‍थान लेंगे। न्‍यायमूर्ति गोगोई करीब 13 महीने के कार्यकाल के लिए तीन अक्‍तूबर को पदभार संभालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्‍ठ जज जस्टिस रंजन गोगोई 3 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्याधीश पद की शपथ लेंगे. बता दें कि वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल 2 अक्टूबर को खत्म हो रहा है. कानून मंत्रालय ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी. न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल नवंबर, 2019 तक होगा. कुछ दिन पहले ही कानून मंत्रालय ने मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा से अपने उत्तराधिकारी के नाम की अनुशंसा करने को कहा था. कानून मंत्रालय के लिए यह परिपाटी रही है कि वह मुख्‍य न्‍यायाधीश को पत्र लिखकर पूछे कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा.

जस्टिस रंजन गोगोई उन चार जजों में शामिल थे जिन्‍होंने जनवरी महीने में मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में यह कहते हुए आलोचना की थी कि वह मामलों के आवंटन में सुप्रीम कोर्ट के मास्‍टर ऑफ द रोस्‍टर होने के अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं. वतर्मान में वह असम के नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) मामले की सुनवाई कर रहे हैं. 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने जस्टिस गोगोई को मृदुभाषी लेकिन बेहद सख्‍त जज के रूप में जाना जाता है.

वकालत करते हुए बने जज

18 नवंबर 1954 को जन्मे रंजन गोगोई ने 1978 में बतौर वकील अपना पंजीकरण कराया. फिर गुवाहाटी हाई कोर्ट में वकालत करने लगे. फिर 28 फरवरी 2001 को वह स्थाई जज बने. 9 सितंबर 2010 को उनका ट्रांसफर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के लिए हुआ. 12 फरवरी 2011 को जस्टिस रंजन गोगोई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हुए. फिर 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए.
रंजन गोगोई ने दिए कई अहम फैसले

सुप्रीम कोर्ट की कई पीठों का हिस्सा रहने के दौरान जस्टिस रंजन गोगोई अहम फैसले दे चुके हैं. चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को संपत्ति, शिक्षा व चल रहे मुकदमों का ब्योरा देने के लिए आदेश देने वाली पीठ में रंजन गोगोई भी शामिल थे. मई 2016 में जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस पीसी पंत की पीठ ने मुंबई हाईकोर्ट के 2012 के उस ऑर्डर को निरस्त कर दिया था, जिसमें कौन बनेगा करोड़पति शो से अमिताभ की कमाई के असेसमेंट पर रोक लगाई गई थी. दरअसल इनकम टैक्स विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर आरोप लगाया था कि 2002-03 के दौरान हुई कमाई पर अमिताभ ने 1.66 करोड़ रुपये कम टैक्स चुकाया था.

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