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इंडियन आवाज़     17 Jul 2018 01:58:08      انڈین آواز
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सुप्रीम कोर्ट :निर्भया के गुनहगारों की फांसी की सजा बरक़रार

उच्‍चतम न्‍यायालय ने दिसंबर 2012 के निर्भया दुष्‍कर्म और हत्‍यामामले में तीन अभियुक्‍तों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। न्‍यायालय ने सजा पर पुनर्विचारकी उनकी याचिका खारिज कर दी है। प्रधान न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा, न्‍यायमूर्ति आर भानुमतिऔर न्‍यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने मुकेश, पवन गुप्‍ता और विनय शर्मा की याचिका यहकहते हुए खारिज कर दी कि फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं है।

sc

प्रदीप शर्मा

दिल्ली के वसंत विहार में दिसंबर, 2012 में हुए दुष्कर्म कांड के तीन दोषियों की फांसी की सजा के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के तीन दोषियों की फांसी पर मुहर लगी दी है। कोर्ट ने मुकेश, विनय और पवन की पुनर्विचार याचिका को आधारहीन बताते हुए ख़ारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मुख्य फ़ैसले में दख़ल देने का कोई आधार नज़र नही आता है।

 बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के चार दोषियों को गत वर्ष पांच मई को फांसी की सजा सुनाई थी। अक्षय को छोड़कर तीन दोषियों ने सजा के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, लेकिन चौथे अभियुक्त अक्षय ने फैसला सुरक्षित होने तक पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी। कोर्ट ने मुकेश, विनय और पवन की पुनर्विचार याचिका पर बहस सुनकर गत चार मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 मार्च, 2014 को मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई थी।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई 2017 में हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।

 गौरतलब है कि 16 दिसंबर, 2012 की रात फिल्म देखकर लौटते समय 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्र निर्भया (बदला हुआ नाम) से छह लोगों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया था और हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी थीं। दोषियों ने निर्भया और उसके मित्र को नग्न हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया था। दोनों को कुचलकर मारने की कोशिश भी की गई थी। इस मामले में दिल्ली की निचली अदालत और हाई कोर्ट ने चार दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा को मौत की सजा सुनाई थी।

 एक अभियुक्त ने ट्रायल के दौरान जेल मे खुदकशी कर ली थी, जबकि एक अन्य नाबालिग था जो तीन साल की सजा पूरी होने के बाद छूट चुका है। चारों अभियुक्तों ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पांच मई को चारों की फांसी पर अपनी मुहर लगा दी थी। इसके बाद तीन अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट के तय नियमों के मुताबिक फांसी की सजा पाए दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर तीन न्यायाधीशों सीजेआइ दीपक मिश्रा, आर. भानुमति और अशोक भूषण की पीठ ने खुली अदालत में बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था।

 चारों दोषियों की मौत की सजा पर मुहर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘इस घटना से सदमे की सुनामी आ गई थी और इसने सभ्यता के तानेबाने को नष्ट कर दिया था।दोषियों की हैवानियत और अपराध की भयावहता का वर्णन करते हुए कोर्ट ने कहा था कि लगता है यह कहानी किसी दूसरी दुनिया की है जहां इंसानियत का अनादर होता है।

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