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इंडियन आवाज़     17 Oct 2017 08:44:39      انڈین آواز
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ताजपोशी के बाद अखिलेश यादव को मिला नेताजी का आशीर्वाद

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AMN / AGRA

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फिर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आगरा में चल रहे सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें सर्वसम्मति से सपा का अध्यक्ष चुना गया है। खास बात ये है कि पहले अध्यक्ष पद का कार्यकाल तीन साल के लिए होता था, लेकिन इस बार अखिलेश को पांच साल के लिए चुना गया है। इसके लिए पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया है।

इससे पहले हुए राज्य स्तरीय सम्मेलन में सपा का प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को चुना गया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही सपा की कमान पूरी तरह अखिलेश के हा‌थों में आ गई है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल भी अखिलेश खेमे के ही हैं।

अखिलेश ने इस मौके पर अपने पिता व सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कहा कि उनकी मुलायम से कई बार फोन पर बात हुई और उनसे आशीर्वाद भी मिला। उन्होंने कहा, हमने नेताजी (मुलायम) से भी कहा था कि आज सम्मेलन होने जा रहा है, अगर आप आएंगे तो हम सभी को बहुत अच्छा लगेगा।

मैंने उनसे कल भी बात की, सम्मेलन में आने से पहले भी बात की और कहा कि सम्मेलन बहुत बड़ा होगा लेकिन अगर आपका आशीर्वाद नहीं होगा तो पार्टी आगे नहीं बढ़ेगी। इस पर नेताजी ने हम सबको फोन पर आशीर्वाद दिया है। मालूम हो कि सपा के इस अधिवेशन में मुलायम ने शिरकत नहीं की है।

आज निर्वाचन की घोषणा होने के बाद अपने पहले संबोधन में सपा अध्यक्ष ने कहा, आज देश के जो हालात हैं, वह किसी से छुपे नहीं हैं। आज ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का किसान संकट में है। भाजपा के लोगों ने प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन जो कर्ज माफ होना चाहिए, वह नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि जिस तरीके से जीएसटी की व्यवस्था बनाई गई है, उससे बड़े पैमाने पर उद्योग और व्यापारी संकट में आ गए हैं। नोटबंदी से जो व्यापार रुका था वह जीएसटी के कारण बंद हो गया। इन दोनों ने मिलकर नौजवानों का रोजगार छीन लिया है। अखिलेश ने कहा, हम समाजवादी लोगों को संकल्प लेना होगा कि हम उनके पहाड़ जैसे झूठ का पर्दाफाश करेंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपा जितनी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, उसका झूठ भी उतने ही बड़े पहाड़ जैसा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा उत्तर प्रदेश और अपनी मौजूदगी वाले अन्य राज्यों में बड़ी ताकत से लोकसभा में पहुंचे। हमें संकल्प करना होगा कि सपा और उसकी साइकिल और तेजी से आगे बढ़ती जाए।

अखिलेश ने राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से आये 15 हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूर्व में जब भी आगरा में सपा का अधिवेशन या कार्यकारिणी बैठक हुई है, पार्टी और मजबूत हुई है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उम्मीद है कि आने वाले समय में सपा और मजबूत दिखेगी।

इससे पहले ताजनगरी आगरा में चल रहे सपा के दसवें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान उन्हें पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। वह लगातार दूसरी बार दल के अध्यक्ष चुने गए हैं। निर्वाचन अधिकारी एवं सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने अखिलेश के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की। इस घोषणा के दौरान सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और उनके छोटे भाई व अखिलेश के प्रतिद्वंद्वी चाचा शिवपाल यादव मौजूद नहीं थे।

इस अधिवेशन में राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव को भी मंजूरी दी जा सकती है। साथ ही इस अधिवेशन में सबकी नजरें इस बात पर थीं कि क्या मुलायम सिंह यादव इस अधिवेशन में शामिल होंगे, हालांकि पिछले हफ्ते अखिलेश यादव ने मुलायम से मुलाकात की थी और उन्हें अधिवेशन का न्योता दिया था। कयासों के विपरीत मुलायम सिंह यादव पार्टी के आगरा अधिवेशन में शामिल नहीं हुए।
पिछले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनज़र माना जा रहा था कि सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भाई शिवपाल सिंह यादव और बेटे अखिलेश यादव के बीच चली रस्साकशी में समर्थन देने के लिए बेटे को चुन लिया है। यानी कि वे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद का ताज फिर से अखिलेश को देना चाहते हैं। अखिलेश इस बात का दावा कर चुके थे। मुलायम सिंह भी संकेत दिया था कि उनका आशीर्वाद बेटे के साथ है। ऐसे में यह लगभग माना जा रहा था कि इस बार अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष पद मुलायम सौंपेंगे और वह भी पांच साल के लिए।

सपा के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि बढ़ाकर उसे पांच साल करने सहित विभिन्‍न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। उधर, मुलायम के सहारे ‘समाजवादी सेक्‍युलर मोर्चे’ के गठन की उम्‍मीद लगाए शिवपाल पर अब अपनी राह चुनने का दबाव है।

शिवपाल के करीबियों का कहना है कि सपा के राष्‍ट्रीय अधिवेशन के बाद वह कोई फैसला ले सकते हैं। पिछली 23 सितंबर को लखनऊ में आयोजित सपा के प्रांतीय अधिवेशन में अखिलेश ने शिवपाल यादव गुट को ‘बनावटी समाजवादी’ की संज्ञा देते हुए समर्थक कार्यकर्ताओं को‘बनावटी समाजवादियों’ के प्रति आगाह किया था।

अखिलेश ने सपा के आठवें प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था, कई बार लोग सवाल उठाते हैं….मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि नेताजी (मुलायम) हमारे पिता तो रहेंगे ही, उनका आशीर्वाद भी बना रहेगा, तो हम समाजवादी आंदोलन को बढ़ाएंगे और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया था। माना जा रहा है कि इस राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में इसकी तैयारियों की रूपरेखा तय हो सकती है। कुल मिलाकर गुरुवार को यूपी में राजनीतिक सरगर्मी तेज रहने वाली है।

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