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इंडियन आवाज़     26 Sep 2018 09:01:05      انڈین آواز
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तलाक बिल के विरोध में मुस्लिम महिलाओं का विशाल प्रदर्शन

कहा यह बिल समाज विरोधी भी है क्योंकि इस में एक सामाजिक अनुबंध को सज़ा का पात्र बनाया जा रहा है

MUSLIM WOMEN AIMPLB

AMN /पटना

बिहार की राजधानी पटना में मुस्लिम महिलाओं ने तलाक विरोधी बिल (दी मुस्लिम विमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट ऑन मैरिज ) बिल 2017 के विरोध में रविवार विशाल परदर्शन किया। हजारों की संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने पटना साइंस कॉलेज से सब्जी बाग मोड़ तक मौन जुलूस में निकाल कर सरकार के सामने अपनी नाराजगी प्रकट की और सरकार के सामने निम्न लिखित मांगें रखीं ।

हम पटना जिला की मुस्लिम महिलाएं तलाक विरोधी बिल (दी मुस्लिम विमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट ऑन मैरिज ) बिल 2017 जो कि लोक सभा से 28 दिसंबर 2017 को पास हुआ है उस का घोर विरोध करते हैं,इस के विरुद्ध अपनी नाराजगी एवं गुस्सा प्रकट करते हैं और इस बिल का घोर विरोध करते हुए सरकार से मांग करते हैं कि अति शीघ्र इस बिल को वापिस ले क्योंकि:

 

PROTEST AGAINST TALAQ BILL

 

1. यह बिल मुस्लिम प्रस्न्ल लॉ में खुला हस्तक्षेप है और भारतीय संविधान की धारा 14 और 15 का उल्लंघन है।

2. यह बिल महिला विरोधी एवं बाल विरोधी है। क्योंकि जब पति 3 साल के लिए जेल में होगा तो वह इस बिल के अनुसार पत्नी एवं बच्चों को गुज़ारा भत्ता कैसे देगा? अगर पति रोज़ मजदूरी करने वाला है और अगर वह सरकारी कामचारी है तो जेल जाने के कारण उस की नौकरी छूट जाएगी तो फिर वह गुज़रा भत्ता किस प्रकार देगा ? इस के अतिरिक्त तीन तलाक को साबित करने का दायित्व भी पत्नी ही पर डाला जा रहा है यह महिलाओं पर ज़ुल्म है ।

3. इस बिल के प्रारूप से पता चलता है कि सरकार ने इस बात पर बिलकुल गौर नहीं किया कि जब पति तीन सालों के लिए जेल चला जाएगा तो उस के बाद पत्नी और उस के बच्चों को किन भयानक परिस्थितियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। तलाकशुदा पत्नी और बच्चों का खर्च कौन चलाएगा? बच्चों की देखभाल कौन करेगा ? क्या जब तीन साल जेल में रहने के बाद पति वापिस आएगा तो वह अपनी उस पत्नी के साथ खुश रह पाएगा जिस के कारण वह तीन साल जेल में रहा है । और क्या उन का संबंध दोबारा सही से बन पाएगा ?

4. सत्तारूढ़ दल की ओर से यह दुष्प्रचार किया जा रहा है यह बिल तीन तलाक के विरुद्ध है मगर वस्तुतः यह बिल तलाक के समुर्ण व्यवस्था को समाप्त करने के लिए है । सरकार के तत्कालीन अटार्नी जेनरल ने खुद सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यू यू ललित के पूछने पर कबूल किया था कि हम तलाक की पूरी व्यवस्था को ही समाप्त करना चाहते हैं । हम समझते हैं कि यह बिल मुस्लिम मर्दों को जेल में डालने एवं महिलाओं को कोर्ट का चक्कर लगाने के लिए मजबूर करने के लिए है । हम मुस्लिम महिलाएं इस बिल को एक काला कानून के रूप में देखती हैं और इस को समाप्त करने की मांग करती हैं ।

5. इस के अतिरिक्त यह बिल समाज विरोधी भी है क्योंकि इस में एक सामाजिक अनुबंध को सज़ा का पात्र बनाया जा रहा है । इस बिल के अनुभाग 7 में लिखा है कि “ यह कृत्य अदालती दायरह-ए-कार के अंदर एवं गैर ज़मानती है” इस का मतलब है कि कोई थर्ड पार्टी भी पति के खिलाफ शिकायत कर सकता है और उस में पत्नी की इच्छा को महत्व नहीं दिया जाएगा। इसी प्रकार निकाह एक सामाजिक अनुबंध है लेकिन यह बिल उस को क्रीमनल एक्ट बना देगा जो की अनैतिक एवं अनावश्यक है । साल 2006 में उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री एच के सेमा एवं माननीय न्यायाधीश श्री आर वी रविन्द्रण ने एक मुकदमे में यह फैसला सुनाया था कि सिविल केस को क्रीमनल केस में नहीं बदला जा सकता है क्योंकि यह न्याय के सिद्धान्त के विरुद्ध है ।

6. हम सभी महिलाएं शरीयत (मुस्लिम प्रसनल लॉ ) पर पूर्णत: विश्वास रखती हैं एवं उस पर अमल करती हैं और इस बात पर पूर्ण विश्वास रखती हैं कि इस्लाम में तलाक का प्रावधान हम महिलाओं के लिए अभिशाप नहीं अपितु वरदान है । उपरयुक्त तथ्यों के आधार पर और उपरयुक्त परिस्थितियों में हम मुस्लिम महिलाएं इस बिल का विरोध करती हैं और सरकार से मांग करती हैं कि वह वह इस बिल को वापिस ले क्योंकि यह भारतीय संविधान के,महिलाओं के अधिकार के एवं जेंडर जस्टिस के विरुद्ध है ।

जुलूस के बाद ए ० डी ० एम् विधि व्यस्था मो मोइज़ुद्दीन को गवर्नर के नाम एक मेमोरंडम गया /

इस जुलूस में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिला विंग बिहार की संयोजक महजबीं नाज़, होदा रावल , बाज़गा अंजुम, रज़िया , नौशाबा खातून, अंजुम परवीन , रुखसाना कुरैशी, अहमद यास्मीन नाज़, अनवरी बनो, शहला फिरदौस, के अतिरिक्त ईमारत शरिया के नाज़िम मौलाना अनिसुर रहमान क़ासमी, जमात इस्लामी बिहार के अमीर मोकामी मौलाना रिज़वान इस्लाही,जमीअत उलेमा बिहार के सचिव प्रचार अनवारुल होदा , वार्ड पार्षद असफर अहमद,मौलाना शिब्ली क़ासमी, मौलाना सुहैल नदवी, मौलाना वासी अहमद क़ासमी, मौलाना रिज़वान अहमद नदवी,आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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