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इंडियन आवाज़     23 Jul 2018 12:08:01      انڈین آواز
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जीएसटी GST में छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, हर महीने रिटर्न भरने से छुटकारा

The Union Minister for Finance and Corporate Affairs, Shri Arun Jaitley chairing the 22nd GST Council meeting, in New Delhi on October 06, 2017. The Minister of State for Finance, Shri Shiv Pratap Shukla, the Revenue Secretary, Dr. Hasmukh Adhia and the Chief Economic Adviser, Dr. Arvind Subramanian are also seen.

AMN / NEW DELHI

अब 50 हजार की खरीद पर पैन जरूरी नहीं

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की यहां विज्ञान भवन में शुक्रवार (06 अक्टूबर को) केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई 22वीं बैठक में छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए उन्हें हर महीने रिटर्न भरने से छूट देने का फैसला लिया गया है।

डेढ़ करोड़ रुपये तक के टर्नओवर पर पहले हर महीने रिटर्न भरने का प्रावधान था जिसे अब त्रैमासिक कर दिया गया है। इसके अलावा 50,000 रुपये तक की खरीद पर पैन की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया है। सरकार ने जेम्स एंड ज्वेलरी पर से जीएसटी हटा लिया है। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। जीएसटी कांउसिल के फैसले के मुताबिक अब 2 लाख तक की खरीदारी करने पर पैन नंबर देना होगा।

जीएसटी काउंसिल ने 23 अगस्त को जारी अधिसूचना वापस लेने का फैसला किया है। इसके तहत सर्राफा कारोबारियों को सर्राफा बेनामी एक्ट में लाया गया था लेकिन अब उन्हें इस एक्ट से बाहर रखा गया है। काउंसिल का बैठक में फैसला लिया गया है कि 50, 000 रुपये से ज्यादा की ज्वेलरी खरीद करने पर किसी भी व्यक्ति से ना तो आधार लिया जाएगा और ना ही पैन नंबर। बता दें कि सर्राफा व्यापारी लंबे समय से इसका विरोध कर रहे थे।

गौरतलब है कि जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) को 30 जून की मध्यरात्रि से देश भर (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू किया गया था। इसके तहत 20 लाख तक का व्यापार करने वालों को जीएसटी से बाहर रखा गया था। साथ ही 75 लाख तक के व्यापारी को कम्पोजिट स्कीम में लाकर जीएसटी से राहत देने की बात कही गई थी लेकिन जीएसटी लागू होने के तीन महीने बाद इसके क्रियान्वयन में आई परेशानियों को देखते हुए सरकार ने इसमें कुछ संशोधन का फैसला किया है। अब काउंसिल ने कम्पोजिट स्कीम के तहत 75 लाख की सीमा को बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया है।

जीएसटी काउंसिल ने सभी वस्तुओं और सेवाओं को चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) में बांटा था। काउंसिल ने 12011 वस्तुओं को इन चार वर्गों में रखा है। बता दें कि 30 जून की मध्य रात्रि संसद भवन में आयोजित लॉन्चिंग समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, तत्कालीन उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर, वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा तमाम केंद्रीय मंत्री मौजूद थे। जीएसटी लॉन्चिंग के वक्त कहा गया था कि जीएसटी भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव लाते हुए एकल बाजार में 2,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोगों को जोड़ेगी।

GST बदलाव 👇🏼👇🏼

🔺एक ही फार्म से रिटर्न भरी जाएगी अब।
🔺 छोटे कारोबारी 3 महीने में भर सकते है रिटर्न।
🔺 एक्सपोर्टर्स के रिफंड के चेक इसी महीने 10 अक्टूबर को जुलाई के एवम 18 अक्टूबर को अगस्त के दे दिए जाएंगे।
🔺 निर्यातकों को अप्रेल 2018 से ई वालेट दिया जाएगा जिसमे सरकार कुछ एडवांस पैसा व्यापारियों को देगी जिससे रिफंड और टैक्स एडजस्ट हो सके।
🔺 ज्यादा छोटे व्यापारी कुछ सामान्य शर्तो के साथ टॅक्स फाइल करने से छूट भी ले सकते हैं यानी रिटर्न भरने की ज़रूरत नही होगी।
🔺 कोमपॉजिशन स्कीम का दायरा बढ़ाया गया, 75 लाख वालो को 1 करोड़ तक कि सीमा बढाई। टॅक्स भी घटाया गया।
🔺 डेढ़ करोड़ की टर्नओवर वाले मंथली की जगह क्वार्टरली रिटर्न भर सकेंगे।
🔺 रेस्टोरेंट मालिको को बस 5% टॅक्स देना पड़ेगा।
🔺 ट्रेडर्स को 1% देना होगा।
🔺 1 करोड़ तक टर्नओवर वालो को मात्र 1% टॅक्स देना होगा।
🔺 निर्यातकों को केवल 5% टॅक्स देना होगा।
🔺 रोजमर्रा की लगभग 60 उपभोक्ता वस्तुओं पे टॅक्स बिल्कुल कम किया जाएगा।

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