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इंडियन आवाज़     20 Oct 2018 05:13:02      انڈین آواز
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गूगल डूडल ने महाश्वेता देवी को याद किया-MAHASHWETA DEVI

mahashaweta devi

गूगल ने डूडल के जरिये भारत की जानी मानी  लेखिका और एक्टिविस्ट महाश्वेता देवी को उनकी जयंती पर आज याद किया है .१९२६  में 14 जनवरी को बंग्लादेश की राजधानी ढाका में जन्मीं महाश्वेता देवी को गूगल ने डूडल के में साड़ी पहने कुछ लिखती नजर आ रही हैं. महाश्वेता ने लेखन के साथ महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों के हक के लिए लड़ाईयां लड़ीं.

उनकी प्रमुख कृतियों में ‘हजार चौरासी की मां’ के अलावा ‘ब्रेस्ट स्टोरीज’ और ‘तीन कौड़ीर साध’ शामिल हैं. उनकी कई पुस्तकों पर फिल्में भी बन चुकी हैं. महाश्वेता देवी का जन्म वर्ष 1926 में ढाका (अब बांग्लादेश की राजधानी) में हुआ था. लेखन उनको विरासत में मिला था. मां धारित्रि देवी और पिता मनीष घटक दोनों लेखक थे. देश के विभाजन के बाद वे भारत आ गईं. यहां उन्होंने विश्वभारती विश्वविद्यालय से बीए (आनर्स) की डिग्री हासिल की और कलकत्ता विश्वविद्यालय से एमए किया.

नहीं रहीं ‘हजार चौरासी की मां’ की रचयिता महाश्वेता देवी

जाने-माने बांग्ला फिल्म निदेशक ऋत्तिक घटक महाश्वेता के भाई थे. महाश्वेता देवी का विवाह जाने-माने बांग्ला अभिनेता बिजन भट्टाचार्य से हुआ था. वर्ष 1948 में उनके बेटे नवारुण का जन्म हुआ. वे भी आगे चल कर लेखक बने. कुछ साल पहले उनके निधन के बाद से महाश्वेता देवी काफी दुखी थीं.

महाश्वेता की पहली पुस्तक ‘झांसी की रानी’ वर्ष 1956 में छपी थी. वर्ष 1964 में वह कलकत्ता के बिजयगढ़ कालेज में प्रोफेसर बनीं. अध्यापन के अलावा उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया. वर्ष 1984 में रिटायर होने के बाद वे साहित्य में ही रम गईं.

एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने अपना जीवन आदिवासियों के विकास के प्रति समर्पित कर दिया था. शबर जनजाति के हित में किए गए कार्यों की वजह से ही उनको शबरों की मां कहा जाता था. वह विभिन्न आदिवासी संगठनों से जुड़ी थीं. इसके अलावा वे ‘बार्तिके’ नामक एक आदिवासी पत्रिका का संपादन भी करती थीं.

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