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इंडियन आवाज़     20 Aug 2018 10:33:09      انڈین آواز
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केरल की हादिया को मिली आज़ादी, प्यार पाना अभी बाक़ी

hadiya case

केरल ‘लव’ केस : हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ‘मुझे आजादी चाहिए’, पढ़ाई के लिए सलेम भेजी गई

AMN / नई दिल्ली

केरल के कथित लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि हादिया (इस्लाम धर्म अपनाने वाली हिंदू महिला) को उसके माता-पिता अपने कब्जे में न रखें. सुप्रीम कोर्ट ने हादिया से कहा कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करें. सुप्रीम कोर्ट ने हादिया को होम्योपैथी की आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए तमिलनाडु के सलेम भेज दिया. अदालत ने केरल पुलिस को निर्देश दिया कि वह हादिया को सुरक्षा प्रदान करने और यथाशीघ्र उसका सलेम पहुंचना सुनिश्चित करे. अदालत ने कॉलेज से हादिया को फिर से दाखिला देने और हॉस्‍टल में जगह भी देने का निर्देश दिया.

हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में साफ तौर पर कहा, मुझे अपनी आजादी चाहिए. अब जनवरी के तीसरे हफ्ते में इस मामले की आगे की सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट में करीब पौने दो घंटे की सुनवाई के बाद जज ने हदिया से बातचीत शुरू की. जस्टिस चंद्रचूड ने हादिया से अंग्रेजी में सवाल किए, जिसका उसने मलयालम में जवाब दिया. वरिष्ठ वकील वीवी गिरी ने हादिया के जवाब को अंग्रेजी में ट्रांसलेट कर जज को बताया. सुप्रीम कोर्ट ने हादिया से सवाल किया, आपने किस स्कूल में पढ़ाई की? आपने डॉक्टरी पेशे को कैसे चुना? आपकी भविष्य की क्या योजना है? जज ने 25 मिनट तक हदिया से बातचीत की.

हदिया ने कोर्ट में कहा कि उसे 11 महीने से गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया है. उसने BHMS किया है लेकिन वो इंटर्नशिप नहीं कर पाई, वो इसे पूरा करना चाहती है. कोर्ट ने जब यह पूछा कि अगर सरकार खर्चा दे तो क्या आप पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं? इस पर हादिया ने कहा, मेरे पति मेरा खर्च उठा सकते हैं. सरकारी पैसे की जरूरत नहीं है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हादिया को माता-पिता की हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया. हादिया ने विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए यह भी कहा कि मुझे अपनी आजादी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने हादिया को पढ़ाई पूरी करने को कहा. कोर्ट ने कॉलेज को हादिया को फिर से दाखिला देने और हॉस्टल में कमरा देने का आदेश दिया. कोर्ट के इस फैसले के बाद हादिया के पति शफीन जहां ने कहा कि वह इस आदेश से खुश हैं.

Shafin Jahan-Hadia

सुप्रीम कोर्ट  हादिया के साथ शफीं की शादी को अमान्य करार देने के केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शफी की याचिका पर जनवरी के तीसरे सप्ताह में आगे विचार करेगी। शफी जहां ने 20 सितंबर को शीर्ष अदालत में एक अर्जी दायर करके हिन्दू युवती द्वारा धर्म परिवर्तन के बाद उसके साथ विवाह करने के इस विवादास्पद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को सौंपने का आदेश वापस लेने का अनुरोध किया था।

शीर्ष अदालत ने 16 अगस्त को राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को इस घटना की जांच शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर वी रवीन्द्रन की देखरेख में करने का निर्देश दिया था।

शफी जहां ने इस हिन्दू युवती से पिछले साल दिसंबर में विवाह किया था। लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा इस विवाह को अमान्य घोषित करने के फैसले को चुनौती देते हुये उसने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की जिसमें उसने इस निर्णय को देश में महिलाओं की स्वतंत्रता का अपमान बताया था। उच्च न्यायालय ने केरल पुलिस को इस तरह के मामलों की जांच करने का भी आदेश दिया था।

इस युवती के पिता अशोकन के एम ने आरोप लगाया था कि उसे सीरिया में इस्लामिक स्टेट मिशन द्वारा भर्ती किया गया हैऔर जहां तो सिर्फ एक मोहरा है। उनका यह भी आरोप था कि धर्म परिवर्तन और इस्लामिक कट्टरता के लिये एक ‘सुव्यवस्थित तंत्र’ काम कर रहा है।

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