FreeCurrencyRates.com

इंडियन आवाज़     23 May 2018 04:59:38      انڈین آواز
Ad

उत्तर प्रदेश में भूमिहीन और बंटाई पर खेती करने वाले किसानों को कोई राहत नहीं

प्रदीप शर्मा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सूबे के छोटे एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक का कर्ज माफी और 120 लाख टन गेहूं खरीद की घोषणा की तो इस फैसले का ज्यादातर लोगों ने स्वागत किया। भारतीय जनता पार्टी ने विधान सभा चुनाव से पहले किसानों की कर्ज माफी का वादा किया था और चुनाव जीतने के बाद एक हद तक उसे निभाया भी। लेकिन राज्य के किसानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो शायद ज्यादा जरूरतमंद है लेकिन उसे योगी सरकार के इस फैसले से कोई लाभ नहीं मिलेगा।

farmerसामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 2,60,15,544 ग्रामीण परिवार हैं। यूपी में कुल 75704755.44 एकड़ जमीन है। जिन परिवारों के जमीन हैं उनकी संख्या 1,43,65,328 है। यानी उत्तर प्रदेश में 55.22 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही जमीन है। प्रदेश के 11649123 ग्रामीण परिवारों के पास कोई जमीन नहीं है। यानी 44.78 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों भूमिहीन हैं। इन आकंड़ों से साफ है कि योगी सरकार के इस फैसले से यूपी के करीब आधे ग्रामीण परिवारों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। जबकि भूमिहीन होने के कारण इन परिवारों को सरकारी सहायता की ज्यादा जरूरत होगी।

योगी सरकार ने प्रदेश के 94 लाख छोटे और सीमांत किसानों के 36,359 करोड़ रुपये लोन माफ करने की घोषणा की। इस कर्ज-माफी में सात लाख किसानों द्वारा लिए गए वो 5630 करोड़ रुपये भी शामिल हैं जिन्हें विभिन्न बैंक नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर चुके थे। योगी मंत्रिमंडल ने 31 मार्च 2016 तक सूबे के 86.68 लाख छोटे और सीमांत किसानों द्वारा लिए गए 30,729 करोड़ रुपये के फसली ऋण माफ किया जाएगा। योगी सरकार ने प्रति किसान एक लाख रुपये तक का ऋण माफ करने की घोषणा की है। योगी सरकार ने 1625 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम खरीद मूल्य से 80 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का भी ऐलान किया है। प्रदेश सरकार प्रति क्विंटल पर 10 रुपए ढुलाई और लदाई भी मिलेगी।

भारत में एक हेक्टेयर (ढाई एकड़) से कम जमीन वाले किसानों को सीमांत किसान माना जाता है। जिन किसानों के पास एक से दो एकड़ जमीन होती है उन्हें छोटे किसान माना जाता है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 2.30 करोड़ किसान हैं जिनमें से 1.85 करोड़ सीमांत हैं और 0.30 करोड़ छोटे किसान हैं। सामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश के 19,39,617 ग्रामीण परिवारों के पास 50 हजार रुपये या उससे अधिक की सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड है। यानी कुल ग्रामीण परिवारों का 7.46 प्रतिशत। जाहिर है कि बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों का प्रतिशत काफी कम है।

यूपी-बिहार में अगर किसी को मदद की जरूरत है तो वे बंटाई वाले किसान हैं, जो इन दोनों राज्यों की लगभग 80 फीसदी जमीन जोतते हैं। मगर चुकी मालिकाना हक उनके पास नहीं होता तो जाहिर सी बात है उन्हें न लोन मिलता है, न कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी। वे कर्जदार जरूर हैं, मगर बैंकों के नहीं। उनकी जिंदगी आज भी सेठ-साहूकारों के और नये किस्म के सूदखोरों के घर गिरवी है। जो सैकड़ा में 5 और 10 रुपये की दर से कर्ज देते हैं और जिनका कर्ज कभी चुकता नहीं। बाकी बैंकों से लोन लेने वाले अमूमन पहुंच वाले समृद्ध किसान ही होते हैं। सरकारी मुआवजा हो या कर्ज माफी वो उन्हीं को मिलती है जो खेती की जमीन के कागजी मालिक होते जब भी राज्य अथवा केंद्र सरकारों द्वारा किसानों के कर्जे माफ़ किये जाते हैं तो उसका वास्तविक लाभ किसे मिलता है उन किसानों को जिनके पास भू-स्वामित्व के दस्तावेज और भू-लगान मालगुजारी की अद्यतन रसीद हो।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लघु व सीमांत किसानों के कर्जे माफ़ कर दिए, लेकिन इसका लाभ भूमिहीन उन लाखों बटाईदार किसानों को नहीं मिलेगा, क्योंकि उनके पास उस ज़मीन का मालिकाना हक़ नहीं है, जिसपर वह खेती करते हैं. बल्कि इसका एकमुश्त फायदा उन मालिकानों को मिलेगा जो खुद से खेती नहीं करते है, वहीं भूमिहीन बटाईदार किसान जिसने साल भर उस खेत में सपरिवार मेहनत की उसके हिस्से सिर्फ निराशा आएगी।

कर्ज माफी ही की तरह गेहूं की सरकारी खरीद से भी बंटाईदार और भूमिहीन किसान नहीं लाभान्वित होंगे। इन खरीद केंद्रों पर उन्हीं किसानों के अनाज ख़रीदे जाते हैं, जिनके पास संबंधित ज़मीन के कागजात होते हैं, सबसे दुखद बात यह है कि मराठवाड़ा, तेलंगाना, विदर्भ, आंध्र-प्रदेश और कर्नाटक में आत्महत्या करने वाले हज़ारों उन भूमिहीन किसानों के परिजनों को सरकारों की तरफ से कोई मुआवजा नहीं मिला, क्योंकि महसूल महकमे की नजरों में वे किसान नहीं थे, वह इसलिए कि जिसपर वह खेती करता था, उस पर मालिकाना हक़ किसी और का था।

किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ भी उन्हीं लोगों को मिलता है, जिनके पास भू-स्वामित्व के दस्तावेज और भू-लगान ( मालगुजारी ) की अद्यतन रसीद हो। ज़मीन मालिक ग़ैर कृषि कार्य के लिये बैंक से कर्ज़ लेते हैं और उससे भवन, वाहन और अन्य चीजें खरीदते हैं, लेकिन जो वास्तविक रूप से खेती करने वाले भूमिहीन बटाईदार किसान हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता। जाहिर है कि योगी आदित्यनाथ सरकार का कर्जमाफी और गेहूं की सरकारी खरीद का फैसला किसानों के एक वर्ग को लाभ पहुंचाने वाला है लेकिन ये भूमिहीन और बंटाई पर खेती करने वाले बड़े वर्ग को राहत नहीं पहुंचाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad

MARQUEE

Mumbai twins score identical marks in Class XII

WEB DESK/ MUMBAI Mumbai twins Rohan and Rahul Chembakasserill not just look identical but have also scored an ...

Govt to improve connectivity to Gaya and Bodhgaya

Our Correspondent / Gaya Union Tourism Secretary Rashmi Verma on Wednesday informed that Centre was trying to ...

@Powered By: Logicsart