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इंडियन आवाज़     18 Feb 2019 07:26:39      انڈین آواز
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आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18: 7-7.5 फ़ीसदी विकास दर का अनुमान

Economic survey 17-18

AMN

वर्ष 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण में पूर्वानुमान लगाया गया है कि 2018-19 में देश के सकल घरेलू उत्‍पाद-जी डी पी में वृद्धि दर सात से साढ़े सात प्रतिशत तक रहेगी। इसमें कहा गया है कि पिछले वर्ष जो कई प्रमुख सुधार किये गये हैं उनकी वजह से वास्‍तविक जी डी पी वृद्धि दर इस वित्‍त वर्ष में छह दशमलव सात पांच प्रतिशत तक पहुंच जाएगी और इसके बाद 2018-19 में यह बढ़कर सात से साढ़े सात प्रतिशत तक होगी। निर्यात और निजी निवेश भी वृद्धि की ओर है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। सर्वेक्षण में जोर देकर कहा गया है कि वस्‍तु और सेवा कर-जी एस टी के रूप में व्‍यापक सुधार से अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी आने की शुरूआत हो गई। हमारे संवाददाता की एक रिपोर्ट:-

केन्‍द्र सरकार द्वारा जीएसटी, विनियमन और बैंकों को मजबूत करने के लिए पूंजीकरण जैसे किये गये उपायों की वजह से आर्थिक सर्वेक्षण आशावादी है। इसके अलावा भारत को एक आकर्षक निवेश स्‍थल बनाये रखने के लिए सरकार ने और भी कई कदम उठाये हैं। इनमें राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति, जीएसटी कार्यान्‍वयन और व्‍यापार करने में आसानी के लिए किये गये सुधार शामिल हैं। सर्वेक्षण में, दिल्‍ली में हुये वायु प्रदूषण पर भी चिंता व्‍यक्‍त की गई है यह सुझाव दिया गया है कि इससे निपटने के लिये केन्‍द्र और राज्‍य सरकारें मिलकर काम करें। इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण की पुस्तिका गुलाबी रंग की है, जो महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के समर्थन का प्रतीक है।

कृषि, शिक्षा और रोजगार पर फ़ोकस

आर्थिक सर्वे में जिन तीन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा ध्‍यान देने की बात की गई है उनमें कृषि, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्र शामिल हैं. कृषि में उत्‍पादकता को बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है. वहीं रोजगार की बात करें तो सर्वे में युवाओं और उनके बढ़ते कार्यबल की बात की गई है खासतौर पर महिलाओं के लिए अच्‍छी नौकरियां ढूंढने पर जोर दिया गया है और अगर शिक्षा की बात करें तो सर्वे में एक शिक्षित और शिक्षा के जरिए एक स्‍वस्‍थ कार्यबल के निर्माण पर जोर दिया गया है.

देश की विकास दर 7.5 फ़ीसदी तक पहुंचने का अनुमान

आर्थिक सर्वे की मानें तो इस साल यानि 1 अप्रैल, 2017 से लेकर 31 मार्च, 2018 तक हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पौने सात फीसदी यानि 6.75 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है लेकिन उम्मीद भी जाहिर की गई है कि अगले वित्तीय वर्ष यानि 1 अप्रैल, 2018 से लेकर 31 मार्च, 2019 तक हमारा देश तरक्की के रास्ते पर खूब आगे बढ़ेगा और इसकी विकास दर 7 से साढ़े सात फ़ीसदी पर पहुंच सकती है. सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में हमारे देश से होने वाले निर्यात में काफी बढो़तरी होगी जिससे कि देश की आर्थिक सेहत और भी मजबूत होगी.

सुधार के कदम

सर्वे में खासतौर पर कहा गया है कि 1 जुलाई, 2017 को शुरू किए गए वस्‍तु एवं सेवा कर यानि जीएसटी के लागू होने, संसद द्वारा पारित बैंकरप्सी कोड के जरिए आर्थिक दबाव झेल रही प्रमुख कंपनियों को मजबूत करने, लंबे वक्‍त से चली आ रही ट्विन बैलेंसशीट यानि उद्योगों और बैंकों की बैलेंशशीट का समाधान करने, सरकारी बैंकों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने, विदेशी निवेश को और अधिक उदार बनाने और निर्यात को बढ़ाकर अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी लाने से देश विकास के रास्ते पर सरपट दौड़ पड़ी है और इसलिए इस वित्तीय वर्ष में विकास दर 6.75 प्रतिशत दर्ज की जा सकती है. सर्वे के मुताबिक 2017-18 में खेतीबाड़ी में 2.1 फीसदी का विकास, उद्योग धंधे में 4.4 फीसदी का विकास और सेवा क्षेत्र में 8.3 फीसदी विकास होने की उम्‍मीद है.

विमुद्रीकरण यानि नोटबंदी

इकोनॉमिक सर्वे में विमुद्रीकरण यानि नोटबंदी के असर को लेकर भी बात की गई है. सर्वे में कहा गया है कि विमुद्रीकरण का असर 2017 के बीच के महीनों में काफी कम हुआ. यह इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि इस दौरान कैश और जीडीपी अनुपात बेहतर स्थ‍िति में आया.

निर्यात बनेगा सहारा

सर्वे के मुताबिक आने वाले वक्त में निर्यात अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का काम कर सकता है. सर्वे में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था आईएमएफ की तरफ से 2018 में वैश्व‍िक विकास की जो रफ्तार अनुमानित है अगर वही रफ्तार रहती है, तो यह अर्थव्यवस्था की रफ्तार को आधी फीसदी बढ़ा सकता है. सर्वे में यह बात भी कही गई है कि निर्यात का प्रदर्शन और देश के जीवन स्तर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.

उद्योग-धंधे

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 में यह भी कहा गया है कि कोयला, कच्‍चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम, रिफाइनरी उत्‍पाद, उर्वरक, इस्‍पात, सीमेंट एवं बिजली जैसे आठ प्रमुख उद्योगों में 2017-18 के अप्रैल से नवंबर के दौरान 3.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

भारत विश्व की अच्छी अर्थव्यवस्था

सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत को विश्‍व में सबसे अच्छे तरीके से काम करने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक माना जा सकता है क्‍यों‍कि पिछले तीन वर्षों के दौरान औसत विकास दर वैश्विक विकास दर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक है और उभरते बाजार एवं विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत अधिक है. हालांकि आने वाले वर्षों में कुछ कारकों जैसे कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना के कारण जीडीपी विकास दर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात भी सर्वे में कही गई है.

जलवायु परिवर्तन

आर्थिक सर्वे जलवायु परिवर्तन को रोकने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी जिक्र करता है. सर्वे में कहा गया है कि पेरिस घोषणा पत्र में उत्सर्जन स्तर को 2030 तक 2005 के स्तर का 33-35 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है. समानता और सहभागी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने जलवायु परिवर्तन के खतरे की जवाबी कार्रवाई प्रणाली को सशक्त बनाया है.

कारोबार करना आसान

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 में कहा गया है कि विश्‍व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में भारत ने पहले की अपनी 130वीं रैकिंग के मुकाबले 30 स्‍थानों की ऊंची छलांग लगाई है. क्रेडिट रेटिंग कंपनी मूडीज ने भी भारत की रैकिंग को बीएए3 से बढ़ाकर बीएए2 कर दिया है. यह सरकार द्वारा वस्‍तु एवं सेवा कर, दिवाला एवं दीवालियापन संहिता और बैंक के पूंजीकरण समेत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों से संभव हो पाया है.

चुनौतियां

जीएसटी में स्‍थायित्‍व लाना, ट्विन बैलेंसशीट को ठीक करना यानि उद्योंगों और बैंकों की आर्थिक सेहत और भी मजबूत करना और अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए पैदा हुए तमाम खतरों का समाधान करना ये कुछ ऐसी चुनौतियां हैं जिनका जिक्र आर्थिक सर्वे में किया गया है.

दरअसल इकोनॉमिक सर्वे पिछले साल किए गए खर्चों का लेखा-जोखा तैयार करता है. इससे पता चलता है कि सरकार ने पिछले साल कहां-कहां कितना खर्च किया और बजट में की गई घोषणाओं को कितनी सफलतापूर्वक निभाया. इसके साथ ही सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि पिछले साल अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी रही और आने वाले दिनों में कैसी रह सकती है. ये आर्थिक सर्वेक्षण कई मायनों में खास है क्योंकि नोटबंदी के फैसले के 15 महीने और जीएसटी लागू होने के 7 महीने के बाद इसे पेश किया गया है.

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