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इंडियन आवाज़     17 Jul 2018 08:40:21      انڈین آواز
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति कोविन्द का सम्बोधन

 

 PESIDENT KOVIND AT AMU

अलीगढ़

 

  1. इस कन्वोकेशन में मौजूद सभी पदक विजेताओं, शिक्षकों, अन्य सभी विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को मेरी बहुत-बहुत बधाई।
  2. आधुनिक भारत के साथ-साथ दक्षिण-एशिया और दुनियां के अन्य क्षेत्रों में अपने विद्यार्थियों के योगदान के लिए मशहूर इस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।
  3. यह यूनिवर्सिटी देश के विकास में अपनी खास भूमिका निभाती रही है और सन 2020 में अपने सौ साल पूरे करने जा रही है। इस यूनिवर्सिटी की एक प्रभावशाली परंपरा रही है। बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में हमारी आज़ादी की लड़ाई जोरों पर थी। साथ ही, हमारे देश में समाज और संस्कृति के सभी पहलुओं में आधुनिकता को बढ़ावा देने और निरर्थक परम्पराओं से मुक्त होने का अभियान भी पूरे जोश पर था। उस दौर में, इंसान की बेहतरी और तरक्की के लिए तालीम की बुनियादी अहमियत पर ज़ोर देने वाले महापुरुषों ने भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। उसी दौर में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया, बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट – जिसने बाद में जादवपुर यूनिवर्सिटी का रूप लिया, और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण-संस्थानों की स्थापना हुई। आधुनिक नजरिए के साथ ज्ञान-विज्ञान की नई संभावनाओं की तलाश करने वाली पीढ़ियों का निर्माण करना इन संस्थानों का उद्देश्य था। साथ ही, इनकी स्थापना ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के लिए की गयी थी जो अपने देश की साझा संस्कृति तथा नैतिक और आध्यात्मिक परम्पराओं पर गर्व का अनुभव करें। यह गौर-तलब है कि AMU के लिए आर्थिक सहायता देने वालों में बनारस के महाराजा भी शामिल थे। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। अभी कुछ ही दिनों पहले प्रिंस आगा ख़ान से मेरी मुलाक़ात हुई जो अपनी उदारवादी और आधुनिक सोच के साथ कई देशों में विकास की अनेक योजनाओं को सहायता प्रदान करते हैं; उनके पूर्वजों ने भी इस यूनिवर्सिटी की स्थापना में अहम योगदान दिया था।
  4. इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां में अपनी पहचान बनाई है। वे एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों की सरकारों में प्रमुख पदों पर रहे हैं। मैं पिछले साल अक्तूबर के महीने में इथियोपिया के दौरे पर गया था। वहां के प्रधानमंत्री जी की पत्नी श्रीमती रोमन टेसफ़ाये जी ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वे भी इसी AMU की छात्रा रही हैं।
  5. हमारी आज़ादी की लड़ाई में मौलाना हसरत मोहानी और राजा महेंद्र प्रताप की हिम्मत और जज़्बे को बड़े ही सम्मान के साथ याद किया जाता है। भारत-रत्न से अलंकृत ख़ान अब्दुल गफ्फार ख़ान भी इसी विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके थे। इसी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रह चुके डॉक्टर युसुफ मोहम्मद दादू दक्षिण-अफ्रीका की आज़ादी की लड़ाई और रंग-भेद के खिलाफ आंदोलन में पहली कतार के सेनानियों में थे। मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डाक्टर ज़ाकिर हुसैन ने यहां शिक्षा प्राप्त की, स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया और यहां वाइस चान्सलर भी रहे। मेरे लिए यह एक सुखद संयोग था कि मुझे बिहार का राज्यपाल बनने का अवसर मिला; जिस पद को ज़ाकिर हुसैन साहब ने सुशोभित किया था। जैसा कि सभी जानते हैं कि वे देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। इस तरह, वे बिहार-राजभवन और राष्ट्रपति-भवन में भी मेरे पूर्ववर्ती रहे हैं। राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, लॉ, साइंस और टेक्नोलोजी, साहित्य और कला तथा स्पोर्ट्स के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की एक बहुत ही लंबी सूची है। ऐसे विद्यार्थियों ने इस यूनिवर्सिटी के संस्थापकों की उम्मीदों को अंजाम दिया है।

 

प्यारे विद्यार्थियों

  1. आपकी यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में इतनी शोहरत रही है कि महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने अपने शिष्य डॉक्टर रूडोल्फ सैम्यूएल की प्रशंसा करते हुए उन्हे यहां बतौर अध्यापक नियुक्त करने के लिए सुझाव दिया था और आइन्स्टाइन के सुझाव पर वे फ़िजिक्स डिपार्टमेंट में नियुक्त किए गए थे। उसी दौर में यूरोप के वैज्ञानिक डॉक्टर आर. एफ़. हंटर ने भी केमिस्ट्री डिपार्टमेन्ट में यहां के छात्रों को पढ़ाया था।
  2. आपके पूर्ववर्ती छात्रों ने हमारे देश के लिए तरक्की की शानदार मिसालें पेश की हैं जिन पर हमें फख्र है। उनसे प्रेरणा लेकर आप अपनी जिंदगी के मकसद तय कर सकते हैं और अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इस यूनिवर्सिटी की विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आप सब की है और मुझे विश्वास है आप ऐसा करेंगे।
  3. कहा जाता है कि यह पूछे जाने पर कि, “हमारा कारवां आगे कैसे बढ़ेगा?”, आधुनिक शिक्षा के प्रसारक सर सैयद ने जवाब दिया था कि, “हमारे एक हाथ में फलसफ़ा, और दूसरे हाथ में नैचुरल साइंसेज होंगे”। यह एक नए समाज को बनाने वाली सोच थी, जो आज भी प्रासंगिक है। डॉक्टर सैयद ज़हूर कासिम, प्रोफेसर ए. सलाहुद्दीन और डॉक्टर शाहिद जमील जैसे इस यूनिवर्सिटी के छात्रों और अध्यापकों ने आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के जरिए समाज की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  4. आधुनिक टेक्नोलोजी में सफलता को समाज-कल्याण के लिए उपयोग में लाने के अनेक प्रेरक उदाहरण हैं। भारत-रत्न से अलंकृत, मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, पब्लिक-हेल्थ की बेहतरी में योगदान देने वाले यूसुफ़ के. हमीद और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी के अलावा शिक्षा और समाज-कल्याण के क्षेत्रों में भी बहुत बड़ा काम करने वाले अज़ीम प्रेमजी जैसे उदारवादी लोग उनमें शामिल हैं।
  5. डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन हर भारतवासी को प्रेरणा देता है। मुझे बहुत खुशी होती है कि आज के नौजवान, डॉक्टर कलाम को एक आदर्श के रूप में देखते हैं। डॉक्टर कलाम एक निहायत ही साधारण परिवार से थे। कलाम साहब आठ साल की उम्र से ही अखबार बेचने का काम करने लगे थे। वे बहुत सवेरे अपने घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर रामेश्वरम स्टेशन जाकर अखबार का बंडल लेते, और उसे घर-घर पहुंचाते। उसके बाद वे साइकिल से लगभग पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर पढ़ने जाते थे। पढ़ाई से लौटकर वे सवेरे बेचे गए अखबारों के पैसे इकट्ठा करते थे। उनमे शिक्षा के लिए जो ललक थी और कुछ कर गुजरने की जो लगन थी उसके बल पर उन्होने अपने वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा किया। जैसा कि सभी जानते हैं, उन्होने बतौर ‘मिसाइल-मैन’ बहुत शोहरत हासिल की। डॉक्टर कलाम किसी भी विकसित देश में एक आरामदेह जिंदगी बिता सकते थे। लेकिन वे पूरी जिंदगी अपने देश में ही रहकर समाज और देश को बेहतर बनाने की तपस्या करते रहे। ऐसे महापुरुषों की ज़िंदगी से, सभी युवाओं को समाज और देश की भलाई के कामों में लग जाने की प्रेरणा मिलती है; यह सीख भी मिलती है कि अपनी तालीम और तरक्की के साथ-साथ समाज के महरूम तबकों की बेहतरी के लिए भी कुछ करने का जज़्बा होना चाहिए।

[PAUSE]

  1. यह खुशी की बात है कि इस यूनिवर्सिटी में साइंस और टेक्नोलोजी के क्षेत्र में, आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर नये काम किए जा रहे हैं। मुझे बताया गया है कि यहां एक ‘सेंटर फॉर अडवांस्ड रिसर्च इन इलेक्ट्रिफाइड ट्रांसपोर्टेशन’ की शुरुआत की गई है जिसमे भारत सरकार और इंडस्ट्री के साथ संपर्क बनाकर उपयोगी टेक्नोलोजी के विकास से जुड़ा अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों को यूनिवर्सिटी के अन्य विभागों में भी बढ़ाने की जरूरत है ताकि बदलती हुई जरूरतों और माहौल के अनुसार knowledge creation हो सके। आधुनिकता के लिए, विज्ञान और टेक्नोलोजी के साथ-साथ प्रगतिशील सोच भी जरूरी है जिसके मुताबिक समाज का हर तबका बराबरी और भाईचारे के साथ आगे बढ़ता रहे।
  2. इस्मत चुगताई और मुमताज़ जहान जैसी प्रगतिशील महिलाओं ने भारतीय समाज और इस यूनिवर्सिटी की शान में इजाफा किया है। मुझे बताया गया है कि अमरोहा के एक गाँव के एक साधारण परिवार की बेटी खुशबू मिर्ज़ा ने इसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके इसरो के चंद्रयान मिशन में एक वैज्ञानिक के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई है। खुशबू जैसी बेटियों ने इक्कीसवीं सदी की आधुनिक महिला की सही पहचान बनाई है और ‘चिलमन से चाँद’ तक के सफर को शानदार अंजाम दिया है। मुझे बताया गया है कि इस यूनिवर्सिटी में लगभग 37 प्रतिशत तादाद लड़कियों की है लेकिन पदक विजेताओं में उनकी संख्या लड़को से ज़्यादा हुआ करती है। इस साल भी कुल पदक विजेताओं में आधे से अधिक लड़कियां हैं। यह बहुत ही खुशी की बात है कि ‘ओवर-आल एक्सेलेन्स’ के लिए दिया जाने वाला ‘शंकर दयाल शर्मा मेडल भी एक बेटी ने ही जीता है। ऐसी बेटियों की तरक्की में भविष्य के विकसित भारत की झलक दिखाई देती है। इन बेटियों की आवाज, बदलाव की आवाज है जिसे क्लासरूम और यूनिवर्सिटी के बाहर भी पूरा महत्व मिलना चाहिए।

 

  Ladies and Gentlemen

  1. The pursuit of knowledge and the quest for human dignity are inter-connected. These twin goals have been at the centre of the Indian ethos and of our composite civilisation. They have contributed to our diversity, which is our great strength, as well as our open-minded approach as a people. Mutual respect, learning from each other, sharing with each other, and acceptance of alternative ways of thinking and living are not just slogans in our society. They are India’s natural way of life. These lessons hold true for us as a country. They hold true within and between regions of our country. And they hold true within and between communities of our country. It is important to constantly re-new this spirit.
  2. We live in an age of globalisation – of building a world that does not just accommodate but celebrates diversity. And that combines the best of modern technology with the traditions and cultures of our society to build the India of our dreams. Such an India will help every Indian, every boy or girl – irrespective of background or identity – to realize his or her full potential. And such an India will be a beacon of hope for a restless world in the early 21st

 

  1. आज के दौर में इस यूनिवर्सिटी के आप सभी विद्यार्थियों से ये उम्मीद की जाती है कि आप सब केवल देश ही नहीं बल्कि दुनियां के सबसे अच्छे विद्यार्थियों में अपनी जगह बनाएं। आज का दौर, गतिशीलता का दौर है। लोग तेजी के साथ, खुले दिमाग से, पूरी दुनियां से जुड़ते हुए एक ‘ग्लोबल नॉलेज सोसाइटी’ का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे गतिशील माहौल में यहां के शिक्षकों और विद्यार्थियों का दूसरी संस्थाओं में जाना, और दूसरी संस्थाओं के लोगो का यहां आना ‘क्रॉस पोलिनेशन ऑफ लर्निंग’ में मददगार होगा। आज की तालीम में नित नई टेक्नालजी सामने आ रही है, तथा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि ज्ञान-विज्ञान की इस तेज रफ़्तार में पूरे जोश के साथ शिरकत करते हुए यह यूनिवर्सिटी आगे बढ़ती रहेगी।
  2. मुझे पूरी उम्मीद है कि आप सभी विद्यार्थी इस यूनिवर्सिटी की    रिवायात और तरक्की-पसंदी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, देश के विकास में अपना समुचित योगदान देंगे। मैं आप सब को फिर से मुबारकबाद देता हूं और पदक विजेताओं को शाबाशी देता हूं। मेरी यह शुभ-कामना है कि आप सभी, प्रगति करते हुए अपना, अपनी यूनिवर्सिटी और अपने देश का नाम रौशन करें।

 

धन्यवाद

जय हिन्द!

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