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इंडियन आवाज़     14 Nov 2018 11:16:18      انڈین آواز
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अमृतसर ट्रेन हादसा : रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा- हमारी कोई गलती नहीं

ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक लगाता तो जा सकती थीं और जानें

रावण को जलते देख रही भीड़ को ट्रेन ने रौंदा, 61 की मौत

The abandoned belongings of the those who were killed in the accident  at Amritsar on Friday photovishal kumar
photo -vishal kumar (TRIBUNE)

WEB DESK

अमृतसर (Amritsar) में हुए रेल हादसे पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि ड्राइवर ने स्पीड कम की थी. अगर इमरजेंसी ब्रेक लगाता तो बड़ा हादसा हो सकता था. हादसे की जगह अंधेरा था और ट्रैक थोड़ा घुमावदार था.जिसकी वजह से ड्राइवर को ट्रैक पर बैठे लोग नज़र नहीं आए. उन्होंने कहा कि गेटमैन की ज़िम्मेदारी सिर्फ गेट की होती है. हादसा इंटरमीडिएट सेक्शन पर हुआ, जो कि एक गेट से 400 मीटर दूर है, वहीं दूसरे गेट से 1 किलोमीटर दूर है. उन्होंने साफ कहा कि हमारी कोई गलती नहीं है. जो assigned स्पीड है उसी स्पीड से ट्रेन गुजरी. अश्विनी लोहानी ने कहा कि ट्रेन की रफ्तार 90 km/h की थी.

पर जो जानकारी हमें मिली है उसके मुताबिक ड्राइवर ने ब्रेक लगाई और स्पीड 60-65km/h की गई.अश्विनी लोहानी ने कहा कि जिस जमीन पर दशहरा का कार्यक्रम था वो रेलवे की नहीं बल्कि हमारी ज़मीन से सटी हुई ज़मीन है. हमें इसकी कोई जानकारी नही दी गई थी. आपको बता दें कि अमृतसर में शुक्रवार की शाम रावन दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है. दरअसल, अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास शुक्रवार शाम दशहरा (Dussehra 2018) के मौके पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी थी.

रावण को जलते देख रही भीड़ को ट्रेन ने रौंदा, 61 की मौत

अमृतसर में शुक्रवार को धोबी घाट के नजदीक जोड़ा फाटक के पास पटरियों के निकट एक मैदान में दशहरा देखते सैकड़ों लोग रेल की चपेट में आ गये। हादसे में 61 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 70 से अधिक घायल हो गये। मौके पर कम से कम 300 लोग मौजूद थे। सीएम अमरेंद्र सिंह के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने हालांकि मृतकों की संख्या 40 बताते हुए कहा कि आंकड़ा बढ़ सकता है। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक के दोनों ओर शव बिखरे पड़े थे। रावण दहन के दौरान अमृतसर से दिल्ली के लिए रवाना हुई हावड़ा और जालंधर से अमृतसर को आ रही डीएमयू रेलगाड़ियां आ गयीं। अधिकारियों ने बताया कि रावण के पुतले को आग लगाने और पटाखे फूटने के बाद भीड़ में से कुछ लोग रेल की पटरियों की ओर बढ़ना शुरू हो गए, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। उन्होंने बताया कि दो विपरीत दिशाओं से एक साथ दो ट्रेनें आने से लोगों को बचने का बहुत कम समय मिला। इस दौरान चल रहे पटाखों की आवाज के कारण लोगों को रेलगाड़ी आने का पता नहीं चला। अमृतसर के प्रथम उपमंडलीय मजिस्ट्रेट राजेश शर्मा ने बताया कि 52 शवों को बरामद किया गया है और 72 घायलों को एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में मारे गये कुछ लोगों की पहचान हो गयी है। इनमें तरुण माखन (19), नरेंद्र पाल (45), विकास कुमार (34), गुरिंद्र कुमार (40), पवन कुमार (35), चंद्रिका यादव (50), प्रदीप (25), सार्थक (3), बॉवी पांडे (16), जतिंद्र दास, शुभम (2), रोहित शर्मा (22), गणेश राम (45), अभिषेक (13), दलबीर सिंह (32), मदनलाल (60), उसल (21), सरवण (17), वासु (15) शामिल हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को मुफ्त इलाज सहायता दी जाएगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के लिये 2-2 लाख रुपये, जबकि घायलों के लिये 50 हजार रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को मुफ्त इलाज सहायता दी जाएगी। इस बीच शिरोमणि अकाली दल के जिला अमृतसर प्रधान गुरप्रताप सिंह टिक्का ने पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की तरफ से एेलान किया कि घायलों का इलाज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अस्पतालों में मुफ्त इलाज किया जाएगा।

सैकड़ों लोग खड़े थे पटरियों पर
प्रत्यक्षदर्शी बहुजन समाज पार्टी के नेता तरसेम सिंह भोला ने बताया कि रेल लाइनों पर सैकड़ों लोग खड़े थे जो रेलगाड़ी की चपेट में आए हैं। उन्होंने बताया कि घटना के समय रेलवे फाटक भी खुला हुआ था। रेलगाड़ी धड़ाधड़ गुजर गई। उन्होंने बताया कि मरने वालों की संख्या काफी अधिक हो सकती है।

पुलिस प्रशासन और रेलवे भी कटघरे में
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। उन्होंने ट्रेन की स्पीड को लेकर रेलवे को कटघरे में खड़ा किया। हादसे के बाद पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं सवाल यह भी हैं कि इस जगह पर दशहरा कार्यक्रम की इजाजत क्यों दी गई। इस बीच, नवजोत कौर सिद्धू ने कहा ‘रावण दहन हो चुका था और जब यह हादसा हुआ तो मैं वहां से निकल चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के लिए प्रशासन और दशहरा आयोजन समिति जिम्मेदार हैं। ट्रेन के आने पर उन्हें अलार्म देना चाहिए था, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि ट्रेन रुके या धीमी हो जाए। वहीं रेलवे का कहना है कि उसे अमृतसर में दुर्घटनास्थल के पास दशहरा कार्यक्रम की सूचना नहीं दी गई थी।

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